उम्र कम होती जाती है, आकर तुम्हारी बस्ती में,
चेहरे की चमक बढ़ती जाती है, आकर तुम्हारी बस्ती में.
होगी कभी मुलाकात जरूर, आकर तुम्हारी बस्ती मे,
यादगार होगी हर बात, आकर तुम्हारी बस्ती मे.
उम्मीद से बेहतर रही मुलाकात तुम्हारी बस्ती मे,
समझे बहुत से ज़ज्बात आकर तुम्हारी बस्ती में.
अब तक है मिठास बाकी उस रसगुल्ले की
जो खाया था हमने आकर तुम्हारी बस्ती में.
गंगा घाट की धूल, महकी जैसे फूल,
नहीं पाएँगे भूल जो हुआ तुम्हारी बस्ती में.
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