जब भगवान श्री राम वनवास से लौटे तब उनका स्वागत करने के लिए राज्य की समस्त जनता नगर द्वार पर पहुँची.
स्वागत सत्कार के बाद भगवान श्री राम चंद्र ने कहा "सभी पुरुष दाईं तरफ मुड़कर अपने घर जाएँ और सभी स्त्रियाँ बाईं ओर मुड़कर अपने घर जाएँ."
सभी स्त्रियों तथा पुरुषों ने वैसा ही किया.
काफ़ी देर बीत जाने पर भी जब भगवान श्री राम ने देखा कि कुछ लोग अभी भी रुके थे तो भगवान श्री राम ने फिर कहा "सभी पुरुष दाईं तरफ मुड़कर अपने घर जाएँ और सभी स्त्रियाँ बाईं ओर मुड़कर अपने घर जाएँ."
इसपर वहाँ मौजूद लोगों ने भगवान श्री राम से बड़े दीन भाव से कहा "प्रभु हम ना तो पुरुष हैं और ना ही स्त्रियाँ. आप ही बताएँ हम क्या करें?"
ये सुनकर भगवान श्री राम को अपने कथन के अर्थ का ज्ञान हुआ. पर बात तो मुख से निकल चुकी थी.
भगवान श्री राम ने कहा "क्योंकि तुम न तो पुरुष हो ना ही स्त्रियाँ ( अर्थात.... पाठक इतना तो जानते ही हैं) इसलिए जाओ मैं तुम्हे वरदान देता हुँ कि तुम कलयुग मे जन्म लो."
सभी लोग चकित भाव से भगवान श्री राम की ओर देख रहे थे. सभी के मान मे कलयुग की तमाम कल्पनाएं आ रही थी.
उनमे से एक जो कुछ पढ़ा लिखा था उसने कहा "प्रभु मैने सुना है कि कलयुग का जीवन तो बहुत मुश्किल भरा और कष्टदायक होगा. फिर आप हमें ऐसा वरदान क्यो दे रहे हैं?"
भगवान श्री राम उसकी बात सुनकर वैसे ही मुस्कुराए जैसे कोई माँ अपने बच्चे की नादानी भरी बात सुनकर मुस्कुराती है.
जैसे सवाल भरे भाव उस व्यक्ति के चेहरे पर थे ठीक वैसे ही भाव भगवान श्री राम ने अन्य सभी लोगों के चेहरे पर भी देखे मानो ये सवाल उन सबका सामूहिक सवाल था जिसे उस एक व्यक्ति ने अभिव्यक्ति दे दी थी.
भगवान श्री राम ने उन सबके सवाल का जो जवाब दिया उसे सुनकर उन सब के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी.
भगवान श्री राम ने कहा ...............(शेष अगली पोस्ट मे)
( वैसे भगवान ने जो कहा वो तो कह ही दिया. हमारे प्रबुद्ध पाठकों के अनुसार भला भगवान ने क्या कहा? अपनी राय ज़रूर बताएँ)
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